अधिकारियों और कुछ नेताओं के कांग्रेस से कथित साठगांठ का तथ्यों के साथ करेंगे खुलासा — मनोज साहू

सोनहत। मनोज साहू ने कहा कि सोनहत क्षेत्र में कुछ अधिकारियों द्वारा कांग्रेस से जुड़े लोगों को कथित रूप से अनुचित लाभ एवं संरक्षण दिए जाने के मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे एक बड़े स्थानीय जनप्रतिनिधि की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। हम किसी पर केवल आरोप लगाने के बजाय दस्तावेज और तथ्यों के आधार पर वास्तविकता सामने लाएंगे।
मनोज साहू ने कहा—
“मैं सोनहत क्षेत्र की प्रत्येक ग्राम पंचायत में वर्ष 2008 से 2026 तक हुए निर्माण कार्यों की पूरी जानकारी निकलवाऊंगा। ऑफलाइन एवं ऑनलाइन भुगतान, नोटशीट, FTO, निर्माण एजेंसी, सप्लायर तथा भुगतान प्राप्त करने वालों से संबंधित उपलब्ध अभिलेखों की जांच की मांग करूंगा। मनरेगा सहित संबंधित निर्माण कार्यों में हुए वित्तीय लेन-देन का भी हिसाब सामने आना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से कैलासपुर में वर्ष 2015 से 2025 के बीच हुए निर्माण कार्यों से संबंधित स्वीकृति, निर्माण एजेंसी, सप्लायर, FTO, भुगतान और उपलब्ध अभिलेखों की जानकारी दो दिवस के भीतर निकलवाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। यदि दस्तावेजों में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसे सक्षम जांच एजेंसी एवं प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत कर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
मनोज साहू ने कहा कि आज से इन विषयों को भी उनके प्रस्तावित सत्याग्रह आंदोलन की मांगों में शामिल किया जा रहा है। संबंधित वर्षों के FTO और निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच की मांग सत्याग्रह के माध्यम से प्रमुखता से उठाई जाएगी।
उन्होंने कहा—
“लड़ाई अब आर-पार की होगी, लेकिन जिस मूल मुद्दे को लेकर हमने संघर्ष शुरू किया है, उससे एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे। आरोपों का जवाब आरोपों से नहीं, बल्कि दस्तावेजों और तथ्यों से देंगे।”
मनोज साहू ने आगे आरोप लगाया कि सोनहत में कुछ कांग्रेस नेताओं के साथ ऐसे प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, जो भाजपा सरकार और संगठन से राजनीतिक लाभ लेने के बावजूद स्थानीय स्तर पर कांग्रेस से कथित साठगांठ कर रहे हैं। इस कथित गठजोड़ और उससे जुड़े मामलों का भी तथ्यों एवं दस्तावेजों के आधार पर पर्दाफाश किया जाएगा।
उन्होंने कहा—
“कौन किसे संरक्षण दे रहा है, किस निर्माण कार्य में किस एजेंसी और सप्लायर को भुगतान हुआ, FTO किस आधार पर जारी हुए और किन लोगों को लाभ मिला—इन सभी सवालों का जवाब दस्तावेजों से सामने लाया जाएगा। सोनहत के हित और पारदर्शिता की लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है।”




