बैकुंठपुर प्रभारी जनपद सीईओ आरटीआई पर भी भारी, समायावधी बीती फिर भी आवेदक के हाँथ खाली…

बैकुंठपुर(कोरिया)जनपद के प्रभारी सीईओ पर सूचना के अधिकार की अनदेखी के आरोप, आवेदक ने उठाए सवाल
बैकुंठपुर। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समयसीमा के भीतर उपलब्ध नहीं होने का मामला सामने आया है। बैकुंठपुर जनपद पंचायत के प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर आवेदक ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद न तो आवेदक को मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई गई और न ही आवेदन के संबंध में कोई स्पष्ट सूचना दी गई।
जानकारी के अनुसार आवेदक ने जनपद पंचायत बैकुंठपुर में डाक के माध्यम से आरटीआई आवेदन भेजकर ग्राम पंचायतों से संबंधित जानकारी मांगी थी। आवेदन संबंधित कार्यालय में पहुंचने के बाद भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जानकारी उपलब्ध नहीं होने से अब मामला चर्चा में है।
ग्राम पंचायतों से जुड़ी जानकारी मांगी थी
आवेदक द्वारा विभिन्न ग्राम पंचायतों से संबंधित जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई थी। आवेदन में मांगी गई सूचना यदि संबंधित ग्राम पंचायतों के स्तर पर उपलब्ध थी और वहां अलग जन सूचना अधिकारी नियुक्त है, तो आरटीआई अधिनियम के तहत आवेदन को संबंधित लोक प्राधिकारी को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया का सवाल उठता है।
आरटीआई अधिनियम की धारा 6(3) के तहत यदि मांगी गई सूचना किसी अन्य लोक प्राधिकारी के पास है तो आवेदन या उसके संबंधित हिस्से को उस लोक प्राधिकारी को यथाशीघ्र और सामान्यतः आवेदन प्राप्त होने के पांच दिनों के भीतर स्थानांतरित किया जाना होता है। ऐसे में सवाल यह है कि बैकुंठपुर जनपद पंचायत में प्राप्त आवेदन पर निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई या नहीं।
न सूचना मिली, न आवेदन के हस्तांतरण की जानकारी
आवेदक का कहना है कि समयसीमा बीत जाने के बाद भी उसे मांगी गई जानकारी नहीं मिली। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि आवेदन को संबंधित ग्राम पंचायतों अथवा जन सूचना अधिकारियों को भेजा गया या नहीं।
मामले में यदि जानकारी जनपद पंचायत के पास उपलब्ध नहीं थी तो संबंधित कार्यालय को आवेदन हस्तांतरित करने की कार्रवाई करनी थी। वहीं यदि आवेदन हस्तांतरित किया गया है तो उसकी सूचना आवेदक को दिए जाने और संबंधित कार्यालय से जानकारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर भी स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
संज्ञान के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
आवेदक द्वारा मामले को संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप है। इससे सूचना के अधिकार के तहत आवेदन करने वाले नागरिकों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आवेदक को जानकारी देने के बजाय अपील की प्रक्रिया में जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है? यदि ऐसा नहीं है तो फिर निर्धारित समयसीमा में सूचना उपलब्ध कराने अथवा आवेदन को संबंधित जन सूचना अधिकारी को हस्तांतरित करने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
आरटीआई आवेदन के मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि आवेदन किस तारीख को जनपद पंचायत में प्राप्त हुआ, किस अधिकारी ने उसे प्राप्त किया, किस स्तर पर कार्रवाई की गई और यदि सूचना संबंधित ग्राम पंचायतों के पास थी तो आवेदन को कब और किस अधिकारी के पास हस्तांतरित किया गया।
यदि आवेदन पर नियमानुसार कार्रवाई नहीं हुई है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका की जांच किए जाने की जरूरत है।
अब अपील ही विकल्प?
समयसीमा में सूचना नहीं मिलने की स्थिति में आवेदक के पास सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्रथम अपील सहित निर्धारित कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब अधिनियम नागरिक को निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय पर सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था देता है, तो आवेदक को जानकारी प्राप्त करने के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर या अपील की प्रक्रिया से क्यों गुजरना पड़े?
अब देखना होगा कि मामले में बैकुंठपुर जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी क्या स्पष्टीकरण देते हैं और लंबित आरटीआई आवेदन पर कब तक कार्रवाई की जाती है।




