बंशीपुर बालक छात्रावास का कलेक्टर ने किया निरीक्षण व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश, बच्चों से पढ़ाई, भोजन और स्वास्थ्य की ली जानकारी

कोरिया,। कलेक्टर
रोक्तिमा यादव ने सोनहत विकासखंड के दूरस्थ ग्राम बंशीपुर स्थित बालक छात्रावास का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने छात्रावास में रहने वाले बच्चों से पढ़ाई, नाश्ता-भोजन, स्वास्थ्य परीक्षण और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।
कलेक्टर ने शयनकक्ष में बिस्तर, चादर, कंबल, पंखे और साफ-सफाई की स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने छात्रावास अधीक्षक को आवश्यक सामग्री व्यवस्थित एवं स्वच्छ रखने तथा बच्चों की सुविधाओं और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। खिड़कियों में उचित जाली लगाने और अधीक्षक का नियमित रात्रि प्रवास सुनिश्चित करने को भी कहा। अव्यवस्था मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी।
उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए केवल भोजन और रहने की सुविधा पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने प्रत्येक शनिवार को सामान्य ज्ञान, समाचार-पत्र वाचन, खेलकूद और योगाभ्यास जैसी गतिविधियां कराने के निर्देश दिए। बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार कर उनकी झिझक दूर करने तथा वाद-विवाद जैसी रचनात्मक गतिविधियां आयोजित करने पर भी जोर दिया।
छात्र ने पूछा- कलेक्टर बनने के लिए क्या करना होगा?
निरीक्षण के दौरान एक छात्र ने कलेक्टर से पूछा कि कलेक्टर बनने के लिए क्या करना होगा। कलेक्टर ने छात्र की जिज्ञासा की सराहना करते हुए बताया कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए नियमित पढ़ाई, अनुशासन, मेहनत और धैर्य जरूरी है। उन्होंने बताया कि 12वीं के बाद स्नातक की पढ़ाई पूरी कर यूपीएससी या पीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की जा सकती है। इसके लिए समाचार-पत्र पढ़ने और देश-दुनिया के सामान्य ज्ञान पर पकड़ बनाना भी आवश्यक है।
कलेक्टर ने छात्र को प्रोत्साहित करते हुए उसे पेन भेंट किया और जीवन में सफलता की शुभकामनाएं दीं।
सभी छात्रावासों के नियमित निरीक्षण के निर्देश
कलेक्टर ने जिला आदिम जाति विकास विभाग के सहायक आयुक्त को जिले के सभी छात्रावासों का नियमित निरीक्षण कर आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधीक्षकों और शिक्षकों से कहा कि बच्चों की देखभाल और उनके भविष्य को संवारना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। बच्चों की भावनाओं को समझते हुए संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने पर उन्होंने विशेष जोर दिया।




