कोरिया

दूसरे जिले से उधारी के प्रभारी BEO क्यों?,“क्या सोनहत में योग्य शिक्षक खत्म हो गए हैं..

“क्या सोनहत में योग्य शिक्षक खत्म हो गए हैं?”

दूसरे जिले से प्रभारी बीईओ लाने पर सुरेश सिंह का तीखा सवाल—स्थानीय शिक्षकों की योग्यता पर भरोसा क्यों नहीं?

कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष बोले—पहले स्थानीय व्याख्याताओं ने संभाली है जिम्मेदारी, फिर ऐसी क्या जरूरत पड़ी कि सूरजपुर से शिक्षक को लाना पड़ा? नियुक्ति प्रक्रिया और आधार सार्वजनिक करे विभाग

कोरिया जिले के विकासखंड सोनहत में प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति को लेकर अब सियासी और स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। संयुक्त संचालक, शिक्षा विभाग अंबिकापुर द्वारा जारी आदेश के माध्यम से सूरजपुर जिले में पदस्थ एक व्याख्याता शिक्षक को कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड का प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी बनाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया और इसके आधार को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
इस मामले में कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष सुरेश सिंह ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नियुक्ति की निष्पक्ष जांच और प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग की है। सुरेश सिंह का कहना है कि सोनहत विकासखंड सहित पूरे कोरिया जिले में अनुभवी एवं योग्य शिक्षक और व्याख्याता मौजूद हैं, जिन्हें पूर्व में भी प्रभारी शिक्षा अधिकारी जैसी जिम्मेदारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद दूसरे जिले से शिक्षक को लाकर सोनहत में प्रभारी बीईओ की जिम्मेदारी देने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी, यह समझ से परे है।
“क्या सोनहत में एक भी योग्य शिक्षक नहीं?”
सुरेश सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि “क्या सोनहत में योग्य शिक्षक खत्म हो गए हैं? क्या पूरे कोरिया जिले में ऐसा कोई शिक्षक या व्याख्याता नहीं है, जो विकासखंड शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल सके? अगर स्थानीय स्तर पर योग्य लोग मौजूद हैं तो फिर दूसरे जिले से शिक्षक को उधार लेकर लाने की ऐसी क्या आवश्यकता आन पड़ी?”
उन्होंने कहा कि यह केवल किसी व्यक्ति की नियुक्ति का सवाल नहीं है, बल्कि नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़ा विषय है। यदि विभाग के पास दूसरे जिले से शिक्षक को प्रभारी बीईओ बनाने का कोई विशेष प्रशासनिक कारण है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।
पहले स्थानीय शिक्षकों ने संभाली है जिम्मेदारी
सुरेश सिंह ने कहा कि सोनहत में इससे पहले भी स्थानीय स्तर पर पदस्थ व्याख्याताओं और शिक्षकों को प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी दी जा चुकी है। उनके अनुसार स्थानीय स्तर पर पदस्थ अधिकारियों ने जिम्मेदारी संभाली और विभागीय कार्यों का संचालन किया।
ऐसे में सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि “जब पहले स्थानीय शिक्षक और व्याख्याता प्रभारी शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, तब अब ऐसी कौन-सी विशेष परिस्थिति पैदा हो गई कि सूरजपुर जिले से शिक्षक को सोनहत लाकर जिम्मेदारी देनी पड़ी?”
नियुक्ति का आधार क्या रहा?
सुरेश सिंह ने शिक्षा विभाग से नियुक्ति का आधार स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विभाग को यह बताना चाहिए कि प्रभारी बीईओ की जिम्मेदारी सौंपते समय किन मापदंडों को आधार बनाया गया।
क्या इसमें वरिष्ठता, अनुभव, प्रशासनिक कार्यक्षमता, शैक्षणिक योग्यता अथवा अन्य कोई विभागीय मापदंड लागू किया गया? यदि प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत हुई है तो उसका विवरण सार्वजनिक करने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर शिक्षकों में भी यह जानने की उत्सुकता है कि प्रभारी बीईओ के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अधिकारियों की पात्रता का परीक्षण किया गया था या नहीं।
“शिक्षा विभाग में पारदर्शिता जरूरी”
सुरेश सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े पदों पर नियुक्ति और पदस्थापना में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। प्रभारी बीईओ का पद केवल कार्यालयीन जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि विकासखंड के स्कूलों, शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था के संचालन से सीधे जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि “शिक्षा व्यवस्था में नियम सबसे ऊपर होना चाहिए। किसी व्यक्ति विशेष का विरोध हमारा उद्देश्य नहीं है। हमारा सवाल सिर्फ इतना है कि नियुक्ति की प्रक्रिया क्या रही और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध योग्य शिक्षकों को इस जिम्मेदारी के लिए क्यों नहीं देखा गया?”
जांच हो, दूध का दूध और पानी का पानी हो
कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष ने नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई है तो जांच के बाद स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी। लेकिन यदि प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि “हम किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं हैं। हम व्यवस्था में पारदर्शिता चाहते हैं। नियुक्ति सही है तो विभाग दस्तावेजों के साथ सामने आए और बताए कि स्थानीय स्तर पर किस आधार पर किसी को जिम्मेदारी नहीं दी गई। जांच होनी चाहिए और दूध का दूध, पानी का पानी होना चाहिए।”
अब विभाग के जवाब पर निगाह
दूसरे जिले से व्याख्याता को सोनहत का प्रभारी बीईओ बनाए जाने के बाद उठे सवालों के बीच अब शिक्षा विभाग के आधिकारिक स्पष्टीकरण पर निगाहें टिकी हैं। विभाग यदि नियुक्ति का प्रशासनिक आधार, पात्रता और प्रक्रिया स्पष्ट करता है तो मामले की तस्वीर साफ हो सकती है।
फिलहाल स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि जब सोनहत और कोरिया जिले में अनुभवी शिक्षक एवं व्याख्याता उपलब्ध हैं, तो प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी के लिए सूरजपुर जिले से शिक्षक को लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस सवाल का जवाब अब शिक्षा विभाग को देना है।

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