व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टा बना आत्मनिर्भरता का आधार एक हेक्टेयर भूमि पर खेती कर अशोक पाण्डेय ने बढ़ाई परिवार की आय, धान-गेहूं और उड़द का ले रहे उत्पादन

बैकुंठपुर, 5 अक्टूबर। व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टा मिलने के बाद पोड़ी-बचरा विकासखंड के ग्राम बंजारीडांड़ निवासी अशोक कुमार पाण्डेय के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। वर्षों से जिस भूमि पर वे खेती करते आ रहे थे, उस पर कानूनी अधिकार मिलने के बाद अब वे निश्चिंत होकर खेती कर रहे हैं और परिवार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
शासन की योजना के तहत अशोक कुमार पाण्डेय को एक हेक्टेयर भूमि का व्यक्तिगत वन अधिकार मान्यता पत्र प्रदान किया गया। इससे पहले वन विभाग के अभिलेखों में भूमि दर्ज होने के कारण उन्हें बेदखली की चिंता बनी रहती थी। आवश्यक दस्तावेजों और वर्षों से भूमि पर काबिज होने के प्रमाण के आधार पर उन्हें वन अधिकार पट्टा मिला, जिससे उनके परिवार की भविष्य को लेकर चिंता दूर हुई।
पट्टा मिलने के बाद अशोक पाण्डेय ने खेती को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया। वर्तमान में वे अपनी भूमि पर धान, गेहूं और उड़द की खेती कर रहे हैं। हालिया उत्पादन में उन्हें करीब 40 क्विंटल धान, 15 क्विंटल गेहूं और 5 क्विंटल उड़द की उपज प्राप्त हुई है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए शासन की योजनाओं का लाभ लेते हुए उन्होंने तालाब और ट्यूबवेल का निर्माण भी कराया है। इससे खेती के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर हुई और कृषि कार्य को मजबूती मिली।
अशोक पाण्डेय के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ बच्चों की शिक्षा भी नियमित रूप से जारी है। व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टा मिलने से उन्हें न केवल भूमि पर सुरक्षा मिली, बल्कि खेती के माध्यम से सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर भी मिला है।
अशोक कुमार पाण्डेय ने व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टा प्रदान करने के लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके परिवार के जीवन में स्थायी बदलाव लाया है। उन्होंने बताया कि अब वे अपनी भूमि पर बेफिक्र होकर मेहनत कर रहे हैं और खेती को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।




