खबर के बाद शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन,03 अनुपस्थित शिक्षकों को थमाया नोटिस,3 दिन में मांगा जवाब..

सोनहत/कोरिया। कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड के वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत कचोहर के शासकीय माध्यमिक शाला में शिक्षकों की लगातार अनुपस्थिति का मामला सामने आने और समाचार प्रसारित होने के बाद शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई की है। जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता के निर्देश पर विद्यालय के तीनों अनुपस्थित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन दिवस के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि मंगलवार को जिला पंचायत सदस्य सुरेश सिंह ने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान प्रधान पाठक शिवशंकर कमलवंशी, शिक्षिका सोम प्रभा सिदार एवं शिक्षिका सुमन राठौर विद्यालय से अनुपस्थित मिले थे। बताया गया कि यह लगातार पांचवीं बार था जब निरीक्षण के दौरान ये शिक्षक अनुपस्थित पाए गए। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि शिक्षक सप्ताह में केवल दो से तीन दिन ही विद्यालय आते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
निरीक्षण के दौरान संकुल समन्वयक, सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण भी उपस्थित थे। जिला पंचायत सदस्य सुरेश सिंह ने शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए जिला शिक्षा अधिकारी से अनुपस्थित अवधि का वेतन काटने, कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की थी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने तीनों शिक्षकों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि विद्यालय से बिना अनुमति अनुपस्थित रहना एवं अपने पदेन दायित्वों का निर्वहन नहीं करना घोर लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता को प्रदर्शित करता है, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-03 के सर्वथा विपरीत है।
नोटिस में तीनों शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे तीन दिवस के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समयावधि में संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए प्रकरण उच्च कार्यालय को प्रस्तावित किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित शिक्षकों की होगी।
शिक्षा विभाग की इस त्वरित कार्रवाई को वनांचल क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वहीं ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि अब विद्यालय में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होगी और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।



