आयुष्मान योजना पर ‘भूख’ का ग्रहण! मनसुख PHC में भर्ती मरीजों के निवाले पर डाका?

प्रभारी चिकित्सा अधिकारी बोले—अस्पताल में किचन नहीं, महिला समूह घर से लाती है भोजन; मरीजों का आरोप—न मेन्यू के अनुसार नाश्ता, न भरपेट खाना, गर्भवती महिलाओं को भी नहीं मिल रहा पौष्टिक आहार

कोरिया जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मनसुख में भर्ती मरीजों को मिलने वाले नाश्ता और भोजन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शासन की योजना के तहत भर्ती मरीजों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं को निर्धारित मेन्यू के अनुसार पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाना है, लेकिन मरीजों का आरोप है कि उन्हें न तो समय पर नाश्ता मिल रहा है और न ही निर्धारित मानक के अनुसार भोजन।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रभारी चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि अस्पताल परिसर में किचन की व्यवस्था नहीं है, इसलिए महिला स्व-सहायता समूह घर से नाश्ता और भोजन बनाकर अस्पताल लाता है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और निर्धारित मेन्यू के पालन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
भर्ती मरीजों का कहना है कि कई बार नाश्ता नहीं मिलता, भोजन भी निर्धारित मेन्यू के अनुरूप नहीं दिया जाता और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाला गर्म एवं पौष्टिक आहार भी नसीब नहीं हो रहा। मरीजों का आरोप है कि कागजों में योजना चल रही है, जबकि हकीकत में उन्हें पर्याप्त भोजन तक नहीं मिल रहा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में किचन की व्यवस्था ही नहीं है, तो मरीजों के भोजन की गुणवत्ता और निगरानी कैसे सुनिश्चित की जा रही है? आखिर जिम्मेदार अधिकारी नियमित निरीक्षण क्यों नहीं कर रहे हैं?
अब सवाल यह उठता है कि क्या भर्ती मरीजों के नाम पर मिलने वाली सरकारी राशि का सही उपयोग हो रहा है या फिर मरीजों के निवाले पर ही डाका डाला जा रहा है? यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि शासन की जनकल्याणकारी योजना को पलीता लगाने का मामला भी माना जा सकता है।
अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं कि वे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।



