कोरिया

अवैध ईंटों से निर्माण का खेल, शासन की गाइड लाइन ध्वस्त :- दिल कुमार गुप्ता

शासन की गाइडलाइन दरकिनार, लाल ईंट से कराया जा रहा निर्माण

कोरिया वन मंडल के देवगढ़ वन परिक्षेत्र में निर्माण कार्यों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि वन विभाग के एक निर्माण कार्य में शासन की गाइडलाइन की अनदेखी कर लाल ईंटों का उपयोग किया जा रहा है, जबकि सरकारी निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश ईंटों के उपयोग को प्राथमिकता देने के निर्देश हैं।
जानकारी के अनुसार वन परिक्षेत्र देवगढ़ के बसवाही क्षेत्र में चबूतरा निर्माण कार्य कराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लाल ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि क्षेत्र में फ्लाई ऐश ईंटें आसानी से उपलब्ध हैं। शासन के निर्देशों के अनुसार विशेष परिस्थितियों को छोड़कर लाल ईंटों के उपयोग पर प्रतिबंध है तथा पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए फ्लाई ऐश ईंटों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है।

अवैध ईट की खरीदी

सोनहत ब्लॉक के कांग्रेस मंडल अध्यक्ष दिल कुमार गुप्ता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वन विभाग के जिम्मेदार क्षेत्र में अवैध ईंट भट्टो से लाल ईंट खरीद कर शासकीय निर्माण कार्यो में खपा रहे है । जबकि क्षेत्र में लीगल तौर से ईंट भट्टो का संचालन नही किया जा रहा है। ताजुब की बात है कि जिस विभाग की मुख्य जिम्मेदारी पर्यवारण संरक्षण की वही जिम्मेदार अवैध ईट भट्टो से खरीदी कर बढ़ावा दे रहे है । जिस भट्टे में वन सम्पदा से अवैध तरीके से कोयला,लकड़ी,रेत,मिट्टी जैसे खनिज सम्पदा खपाई जा रही हो ऐसे अवैध ईट भट्टो के संचालक से ईंट खरीद कर उनके अवैध कारोबार को वन विभाग के जिम्मेदार बढ़ाओ दे रहे है। अवैध कोयला,रेत,लकड़ी कटाई ,मुरुम भी अपने जंगल की रक्षा में तैनात वन कर्मी बचा नही पा रहे है। बल्कि बोनस के तौर पर मलाई मुह तक धकेलने का काम कर रहे है। निर्माण कार्यो में पारदर्शिता के लिए नागरिक सूचना पटल निर्माण स्थल पर सबसे पहले लगाने के लिए शासन ने गाइडलाइंस बनाई है ताकि निर्माण कार्य का नाम लागत जैसे चीजे ग्रामीणों की जानकारी में आम हो पर धरातल में सिर्फ वन विभाग के जिम्मेदारों का अपना बेख़ौफ़ कानून चल रहा है।

पूरे मामले में जब देवगढ़ वन परिक्षेत्र के डिप्टी रेंजर से संपर्क किया गया तो उन्होंने निर्माण कार्य को छोटा बताते हुए कहा कि “छोटा निर्माण कार्य है, छापना है तो छाप दो।” उनके इस जवाब से विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
अब देखना होगा कि वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मामले की जांच कर शासन की गाइडलाइन के अनुरूप कार्रवाई करते हैं या नहीं। वहीं ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।

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