कल्पनाओं को पंख, हौसलों को बल और हुनर को मंच दे रहा ‘द कलेक्टर्स-फिफ्टिन’*

*चौथे सत्र में ‘द शक्ति-15’ में दिखीं ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की खूबियां*
*कलेक्टर रोक्तिमा यादव के नवाचार का चौथा सत्र बेटियों के नाम*
*संवाद, गीत-कविता और खेलों के बीच जीवन प्रबंधन व करियर पर हुई चर्चा*
*कोरिया,/* किसी ने हिंदी तो किसी ने छत्तीसगढ़ी, अंग्रेजी और पंजाबी में अपना परिचय दिया। किसी ने गीत सुनाया तो किसी ने कविता से सराहना बटोरी। छात्राओं ने कलेक्टर रोक्तिमा यादव के बालों में फूल लगाकर अपनापन जताया, वहीं माइंड गेम और कुर्सी दौड़ ने आयोजन को उत्साह से भर दिया। बेटियां अपनी क्षमताओं को पहचानें, स्वयं पर विश्वास रखें और आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों की ओर आगे बढ़ें-इसी विषय पर शनिवार को कलेक्टर आवास में आयोजित ‘द कलेक्टर्स-फिफ्टिन’ के चौथे सत्र में बेटियों को अपनी प्रतिभा दिखाने, जिज्ञासाओं के उत्तर पाने और भविष्य के सपनों पर खुलकर बात करने का अवसर मिला।
कोरिया कलेक्टर रोक्तिमा यादव के नवाचार ‘बियॉन्ड द क्लासरूम विद द कलेक्टर’ के अंतर्गत इस बार का आयोजन बेटियों को समर्पित रहा। चौथे सत्र के विद्यार्थी समूह को ‘द शक्ति-15’ नाम दिया गया। ‘सशक्त बेटियां, सशक्त राष्ट्र’ की भावना पर केंद्रित कार्यक्रम में स्वामी आत्मानंद विद्यालय, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और नवोदय विद्यालय की छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ‘सौम्य महिला सेवा समिति’, बैकुंठपुर की अध्यक्ष रानी प्रसाद थीं।
*अपनी क्षमता पर रखें विश्वास, लक्ष्य की ओर बढ़ाएं कदम*
कलेक्टर यादव ने छात्राओं को स्वयं को किसी से कम नहीं समझने और अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बेटियां ऐसे कार्य करें, जिनसे उन्हें अपने बेटी होने पर गर्व हो। सहज संवाद के दौरान उन्होंने जीवन में प्रबंधन, स्पष्ट उद्देश्य और शिक्षा के महत्व को भी समझाया।
एक छात्रा के सवाल का जवाब देते हुए कलेक्टर ने कहा कि हमें ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए, जो स्वयं या समाज के लिए नुकसानदेह हो। बदलते परिवेश और नई तकनीकों ने सोचने-समझने तथा सीखने के अवसर बढ़ाए हैं, लेकिन आगे बढ़ने के लिए जीवन का उद्देश्य तय करना भी आवश्यक है।
*करियर के अनेक रास्ते, हर क्षेत्र में जरूरी है शिक्षा*
करियर को लेकर छात्राओं की जिज्ञासाओं पर कलेक्टर ने कहा कि आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, वकील या इंजीनियर बनना ही करियर के विकल्प नहीं हैं। खेल, कला-संस्कृति, खानपान और कृषि जैसे क्षेत्रों में भी बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है। एक अच्छा कृषक बनना भी करियर का विकल्प है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए पढ़ाई-लिखाई जरूरी है। छात्राओं ने कलेक्टर से बेहिचक सवाल पूछे। एक छात्रा ने बताया कि परीक्षा कक्ष में प्रश्नपत्र देखते ही वह याद किए हुए उत्तर भूल जाती है। इस पर कलेक्टर ने उसे उत्तर याद करने और परीक्षा के दौरान उन्हें याद रखने के व्यावहारिक तरीके समझाए।
*हार से घबराएं नहीं, कोशिश और सीखने की ललक बनाए रखें*
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रानी प्रसाद ने छात्राओं को प्रयास और सीखने का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जीवन में हार और जीत आती रहती है, लेकिन इन दोनों से अधिक महत्वपूर्ण है लगातार कोशिश करना और सीखने की ललक बनाए रखना। असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
*लड़कियों को कमतर न समझें, बेटियां हर मुकाम हासिल कर रही हैं*
एक छात्रा के प्रश्न पर सौम्य महिला सेवा समिति की सदस्य
नीतू सिंह ने कहा कि लड़के और लड़की में भेदभाव बिल्कुल नहीं होना चाहिए। समाज में आज भी कुछ लोग लड़कियों को कमतर समझते हैं, लेकिन बेटियां अपनी शिक्षा, क्षमता और सकारात्मक सोच से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने छात्राओं को दूसरों की नकारात्मक बातों से प्रभावित हुए बिना अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। समिति की पदाधिकारियों ने जीवन में आने वाली बाधाओं का सामना करने के उपयोगी सुझाव भी दिए।
*खेलों से सीखा धैर्य, एकाग्रता और निर्देशों का महत्व*
कार्यक्रम में सीखने के साथ मनोरंजन का भी समावेश रहा। छात्राओं ने निशाना लगाने के खेल में भाग लिया और पांच-पांच के समूहों में माइंड गेम का आनंद उठाया। संकेतों और निर्देशों के आधार पर चित्र बनाने की गतिविधि में धैर्यपूर्वक सुनना, समझना और उसके अनुरूप चित्र बनाना प्रमुख था। अतिथियों, कलेक्टर और छात्राओं के बीच हुई कुर्सी दौड़ ने माहौल को उल्लास से भर दिया।
*भोजन के दौरान भी करियर और भविष्य पर जारी रहा संवाद*
कलेक्टर ने छात्राओं से करियर और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की। इस दौरान महिला सशक्तीकरण तथा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के संदेश पर भी विचार साझा किए गए। ‘शिक्षित बेटी, सशक्त भारत’ और ‘पढ़ेगी बेटी, बढ़ेगा भारत’ के संकल्प के साथ आयोजित ‘द शक्ति-15’ में बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और समान अवसरों के महत्व को रेखांकित किया गया।
*योजनाओं और सहायता प्राप्त करने के संबंध में दी जानकारी*
महिला एवं बाल विकास विभाग ने लड़कियों व महिलाओं के लिए शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी भी साझा की। छात्राओं को बताया गया कि घर, परिवार, स्कूल, कॉलेज, कार्यालय या अन्य किसी भी स्थान पर किसी भी तरह का अनुचित व भेदभावपूर्ण व्यवहार होने पर विभाग से संपर्क कर मदद ली जा सकती है। उन्हें बिना डरे और बिना संकोच अपनी बात जरूर बताने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
*छात्राओं ने कहा-कलेक्टर से इतने सहज संवाद की कल्पना नहीं की थी*
छात्राओं ने बताया कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि वे जिले की मुखिया के साथ इतनी खुलकर बातचीत कर सकती हैं, उनके साथ भोजन कर सकती हैं और खेलों में भाग ले सकती हैं।
*कलेक्टर के नवाचार से बेटियों को मिला संवाद और प्रतिभा का मंच*
समिति की पदाधिकारियों ने कलेक्टर की इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि इतनी व्यस्तता के बावजूद जिले की प्रशासनिक मुखिया का इतनी संवेदनशीलता दिखाना और एक अभिभावक व मां की तरह बच्चों को प्रोत्साहित करना बहुत बड़ी बात है। पदाधिकारियों ने कहा कि निश्चित ही यह नवाचार अन्य लोगों के लिए प्रेरणादायक साबित होगा।



